Middle Class Salary: हर महीने सैलरी खाते में आती है, लेकिन कई मिडिल क्लास परिवारों को इसका फायदा लंबे समय तक महसूस नहीं होता। सैलरी आने के कुछ ही समय बाद EMI, बिल और कर्ज की किस्तों में बड़ी रकम चली जाती है। ऐसे में पैसा हाथ में आने से पहले ही खर्च होने का एहसास होने लगता है।
मामला सिर्फ कम कमाई का नहीं है। कई लोगों की आमदनी ठीक होने के बावजूद घर, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसे खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ बचत उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाती। इसी वजह से कागज पर आर्थिक स्थिति ठीक दिखने के बाद भी परिवार को आर्थिक सुरक्षा महसूस नहीं होती।
सैलरी का बड़ा हिस्सा कर्ज में चला जाता है
सैलरी आने के बाद सबसे पहले कई लोगों के सामने EMI और दूसरी कर्ज की किस्तें होती हैं। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी बन सकती है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल केवल खरीदारी या सुविधा के लिए नहीं, बल्कि महीने का जरूरी खर्च चलाने के लिए होने लगे।
स्रोत के अनुसार, कुछ परिवार अपनी खर्च करने योग्य आय का 40 प्रतिशत तक हिस्सा कर्ज की सर्विसिंग में खर्च कर रहे हैं। यानी कर्ज का बोझ इतना बढ़ सकता है कि महीने की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़े।
मिडिल क्लास परिवार के सामने कौन-कौन से खर्च हैं
मिडिल क्लास परिवारों के लिए कई बड़े खर्च एक साथ जुड़े होते हैं। घर खरीदना हो या किराए पर रहना, बच्चों की पढ़ाई हो या इलाज का खर्च, हर तरफ पैसे की जरूरत रहती है। इसके अलावा शादी, त्योहार और परिवार से जुड़े दूसरे खर्च भी बजट पर असर डालते हैं।
| खर्च या दबाव | मिडिल क्लास परिवार पर असर |
|---|---|
| EMI और कर्ज | सैलरी का बड़ा हिस्सा पहले ही तय भुगतान में चला जाता है |
| बच्चों की पढ़ाई | स्कूल फीस और कोचिंग के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है |
| स्वास्थ्य | बीमारी या दुर्घटना में बचत तेजी से खत्म हो सकती है |
| घर | किराए या लंबे समय की EMI का बोझ रहता है |
| सामाजिक खर्च | शादी, त्योहार और उपहार जैसे खर्च भी जारी रहते हैं |
बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवार अपनी सुविधाएं छोड़ देता है
बच्चों की शिक्षा मिडिल क्लास परिवारों की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। निजी स्कूल की फीस, कोचिंग और बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में माता-पिता अपनी कई जरूरतों को पीछे कर देते हैं।
स्रोत में बताया गया है कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेते हैं, परिवार के साथ छुट्टियों पर जाना छोड़ देते हैं और अपनी सुविधाओं में कटौती करते हैं। इसके पीछे यह चिंता रहती है कि बच्चों को वही आर्थिक संघर्ष न झेलना पड़े, जो उनके माता-पिता ने देखा है।
एक बीमारी या दुर्घटना पूरी बचत खत्म कर सकती है
मिडिल क्लास परिवारों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा खर्च भी गंभीर आर्थिक दबाव बन सकता है। किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण कुछ ही हफ्तों में वर्षों से जमा की गई बचत खत्म होने की स्थिति आ सकती है।
स्रोत के मुताबिक, ऐसी परिस्थिति में परिवार को इलाज के खर्च और अपनी आर्थिक क्षमता के बीच फैसला करना पड़ सकता है। यही कारण है कि अचानक आने वाला स्वास्थ्य खर्च मिडिल क्लास परिवार की आर्थिक स्थिति को बहुत प्रभावित कर सकता है।
अपना घर लेने का सपना भी बढ़ाता है आर्थिक दबाव
मिडिल क्लास परिवारों में अपना घर होना एक बड़ी इच्छा मानी जाती है। लेकिन घर खरीदने पर लंबे समय तक बैंक की EMI चुकानी पड़ सकती है। वहीं किराए के घर में रहने पर हर महीने किराए का खर्च बना रहता है।
घर के खर्च के साथ शादी, त्योहार और उपहार जैसी जिम्मेदारियां भी चलती रहती हैं। कई बार परिवार आर्थिक दबाव के बावजूद इस बात का ध्यान रखता है कि बाहर से उसकी स्थिति ठीक दिखाई दे। दूसरों के सामने अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी दिखाने का दबाव भी खर्च को बढ़ा सकता है।
आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए क्या बदलाव जरूरी बताए गए
स्रोत में इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। केवल पैसा बचाने के बजाय समय रहते निवेश शुरू करने, एक से अधिक आमदनी के साधन बनाने और जरूरत पड़ने से पहले स्वास्थ्य बीमा लेने पर जोर दिया गया है।
इसके साथ ही ऐसे खर्चों से बचने की बात कही गई है जो केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए किए जाते हैं। स्रोत के अनुसार, आर्थिक स्थिति में बदलाव कुछ सोच-समझकर लिए गए फैसलों से शुरू किया जा सकता है।
स्रोत में बताए गए प्रमुख कदम
- केवल बचत पर निर्भर रहने के बजाय समय रहते निवेश शुरू करना।
- एक से ज्यादा आमदनी के स्रोत बनाने पर ध्यान देना।
- जरूरत पड़ने से पहले स्वास्थ्य बीमा लेना।
- उन चीजों पर खर्च करने से बचना जिनका उद्देश्य केवल दूसरों को प्रभावित करना है।
मिडिल क्लास परिवार के लिए चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि सैलरी कितनी है। घर, शिक्षा, स्वास्थ्य, कर्ज और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच पैसा जल्दी खत्म होने से आर्थिक सुरक्षा का एहसास भी कमजोर पड़ सकता है। स्रोत में बताए गए कदम इसी आर्थिक चक्र को बदलने की दिशा में ध्यान दिलाते हैं।
यह भी पढ़ें: Salary Deduction: आपकी Salary से किन-किन चीजों के लिए कटता है पैसा? जानिए