Higher EPS Pension को लेकर पेंशनरों की परेशानियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी के राज्यसभा सांसद अजीत माधवराव गोपछड़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद का कहना है कि ज्यादा पेंशन से जुड़े कई मामलों में अब भी प्रक्रिया संबंधी दिक्कतें हैं और अलग-अलग अदालतों में मामले चल रहे हैं। उन्होंने पात्र पेंशनरों के मामलों का एक समान और समयबद्ध तरीके से समाधान करने की मांग रखी है।
क्पूया है पूरा मामला?
सांसद ने अपने पत्र में Higher EPS Pension से जुड़े कई मुद्दों को उठाया है। उन्होंने बताया कि नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कर्मचारियों को ज्यादा वेतन के आधार पर EPS में योगदान करके ज्यादा पेंशन पाने का अधिकार बरकरार रखा था। इसके बाद सरकार की ओर से इस फैसले को लागू करने की बात कही गई, लेकिन इसके बावजूद कई पेंशनरों को अब भी प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मौजूदा व्यवस्था में नियोक्ता की ओर से EPS में कर्मचारी के Basic Salary और DA का 8.33 प्रतिशत योगदान किया जाता है। पुराने ₹15,000 वेतन स्तर पर अधिकतम EPS योगदान ₹1,250 था। नए ₹25,000 वेतन स्तर के हिसाब से यह रकम करीब ₹2,083 तक हो सकती है। स्रोत के अनुसार अभी भी ज्यादा पेंशन पाने वालों की संख्या सीमित है।
Para 26(6) पर सवाल
सांसद ने EPF Scheme के Para 26(6) की भी समीक्षा करने की मांग की है। उनके अनुसार मई 2023 में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने भी इस प्रावधान को ज्यादा पेंशन के आवेदन आगे बढ़ाने में एक रुकावट के रूप में बताया था।
मामला यह है कि ज्यादा वेतन पर योगदान के लिए कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से विकल्प दिया जाना होता है और EPFO को उसे मंजूरी देनी होती है। सांसद के पत्र में कहा गया है कि EPFO ने इस विकल्प के लिए कोई तय प्रारूप नहीं बनाया था और क्षेत्रीय कार्यालयों की ओर से भी ज्यादा वेतन पर योगदान की अनुमति से जुड़ी दिक्कतें सामने आईं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए, ताकि पात्र पेंशनरों के दावे केवल प्रक्रिया संबंधी समस्या के कारण न अटकें।
संसद में सांसद अजीत माधवराव गोपछड़े ने क्या कहा?
अजीत माधवराव गोपछड़े ने 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा में Higher EPS Pension से जुड़ा सवाल भी उठाया था। उस समय सरकार की ओर से बताया गया था कि EPFO ने 4 नवंबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए कदम उठाए हैं और इसे छूट प्राप्त तथा गैर-छूट प्राप्त संस्थानों के लिए समान रूप से लागू किया गया है।
इसके बाद यह मामला Parliamentary Assurance No. 271/72 के रूप में दर्ज हुआ, लेकिन सांसद के अनुसार यह आश्वासन अभी भी लंबित है। इसी वजह से उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
अलग-अलग अदालतों में मामले
सांसद ने यह भी बताया कि Higher EPS Pension को लेकर अलग-अलग हाईकोर्ट में मामले चल रहे हैं। इनमें Para 26(6), छूट प्राप्त संस्थान, ट्रस्ट के नियम, पुराने योगदान और न्यायिक निर्देशों को लागू करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
17 सितंबर 2026 के मंत्रालय के एक पत्र का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को छूट प्राप्त और गैर-छूट प्राप्त संस्थानों में समान रूप से लागू किए जाने की बात कही गई है। इसके बावजूद समान स्थिति वाले पेंशनरों को समान मुद्दों के लिए अदालतों का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद उसे समान मामलों में लागू करने के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
ट्रस्ट से जुड़े पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया
पत्र में कुछ BHEL और SAIL ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया है। सांसद के अनुसार मिली शिकायतों में बताया गया है कि कुछ ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों को ज्यादा पेंशन का लाभ मिल रहा है, जबकि समान स्थिति वाले दूसरे ट्रस्ट के कर्मचारियों को ऐसी पेंशन मिलने में परेशानी हो रही है।
सांसद का कहना है कि इस तरह के अंतर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच असमंजस पैदा होता है। इसलिए ऐसे मामलों की एक समान तरीके से जांच और समीक्षा की जरूरत है।
सांसद ने प्रधानमंत्री के सामने रखी ये मुख्य मांगें
प्रधानमंत्री से Higher EPS Pension के मामले में सांसद ने मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:
- Para 26(6) से जुड़ी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।
- समान स्थिति वाले पात्र पेंशनरों के साथ एक जैसी व्यवस्था लागू की जाए।
- अंतिम कानूनी स्थिति को समान मामलों में लागू करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
- EPS-1995 की वित्तीय स्थिति और योगदान व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए।
- पात्र Higher EPS Pension के मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाए।
- Parliamentary Assurance No. 271/72 की समीक्षा कर उसे पूरा किया जाए।
सांसद ने Higher EPS Pension के पूरे मामले की उच्च स्तर पर व्यापक समीक्षा की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि पात्र पेंशनरों के मामलों में बार-बार अदालत जाने की जरूरत कम हो और समान स्थिति वाले लोगों के लिए एक जैसी व्यवस्था हो।
इसके साथ ही उन्होंने EPS-1995 की वित्तीय और आर्थिक स्थिति की भी व्यापक समीक्षा करने की मांग रखी है, ताकि योजना से जुड़े वित्तीय पहलुओं को भी देखा जा सके और लंबित पात्र मामलों का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जा सके।
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