विधवा पेंशन के लिए आवेदन करने के बाद भी अगर सरकारी दफ्तरों में महीनों तक सुनवाई न हो, तो इसका नुकसान किसे उठाना चाहिए? आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि आवेदन करने वाली महिला पात्र है, तो अधिकारियों की देरी के कारण उसे पेंशन के लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता।
यह मामला तडिसेट्टी तिरुपतम्मा का है। उनके पति को दिव्यांगता के कारण पेंशन मंजूर हुई थी, लेकिन 14 जुलाई 2023 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद महिला ने 16 मार्च 2024 को विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया। काफी समय बीतने के बाद भी उनके आवेदन पर फैसला नहीं हुआ।
पेंशन मंजूर होने में लगा लंबा समय
महिला ने पेंशन के लिए कई बार अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। आखिरकार उन्हें अदालत जाना पड़ा। हाईकोर्ट ने 8 जनवरी 2025 को अधिकारियों को उनके आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया।
इसके बाद जनवरी 2026 में महिला की पेंशन मंजूर की गई। उन्हें हर महीने 4,000 रुपये मिलने लगे, लेकिन आवेदन करने के बाद से पेंशन शुरू होने तक की रकम का भुगतान नहीं हुआ था। महिला ने इसी बकाया राशि के लिए अदालत से राहत मांगी।
अधिकारियों ने चुनाव के दौरान लगी रोक का दिया हवाला
राज्य के अधिकारियों का कहना था कि 2024 के लोकसभा और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू थी। इस वजह से नई सामाजिक सुरक्षा पेंशन मंजूर करने में परेशानी आई।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि योजना में आवेदन की तारीख से पिछली अवधि की पेंशन देने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। लेकिन अदालत ने मामले को महिला की पात्रता और आवेदन पर कार्रवाई में हुई देरी के आधार पर देखा।
हाईकोर्ट ने बकाया पेंशन पर क्या फैसला दिया?
3 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति के. श्रीनिवास रेड्डी ने इस मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि जब महिला पेंशन पाने की पात्र थीं, तो अधिकारियों की ओर से आवेदन पर समय से कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उनका लाभ रोका नहीं जा सकता। राज्य के नियमों के मुताबिक, पेंशन आवेदन पर प्रक्रिया पूरी करने के लिए 21 कार्यदिवस का समय निर्धारित था। अदालत ने इसी समय सीमा का उल्लेख करते हुए अधिकारियों की देरी को महिला के अधिकारों से वंचित करने का आधार मानने से इनकार किया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला को 16 मार्च 2024 से नियमित मासिक पेंशन शुरू होने तक का बकाया दिया जाए। इसकी गणना करते समय पहले भुगतान की गई राशि को समायोजित करना होगा। अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी है।
विधवा पेंशन 3,000 से बढ़ाकर 4,000 रुपये करने का आदेश
इस मामले में राज्य सरकार के जून 2024 के आदेश का भी उल्लेख किया गया। इसके तहत विधवाओं सहित पात्र श्रेणियों की मासिक पेंशन 3,000 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये कर दी गई थी। बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2024 से लागू की गई थी। आदेश में यह व्यवस्था भी थी कि बढ़ी हुई पेंशन का भुगतान 1 जुलाई 2024 से तीन महीने के बकाया के साथ किया जाए। हाईकोर्ट ने महिला की बकाया राशि की गणना संबंधित सरकारी आदेशों में तय दरों के अनुसार करने को कहा।
इस मामले में किन तारीखों का ध्यान रखना जरूरी है?
| घटनाक्रम | तारीख या जानकारी |
|---|---|
| महिला के पति की मृत्यु | 14 जुलाई 2023 |
| विधवा पेंशन के लिए आवेदन | 16 मार्च 2024 |
| हाईकोर्ट का आवेदन पर विचार करने का निर्देश | 8 जनवरी 2025 |
| पेंशन मंजूर होने का महीना | जनवरी 2026 |
| फैसले की तारीख | 3 सितंबर 2026 |
| मासिक पेंशन | ₹4,000 |
| बकाया भुगतान की समय सीमा | आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर |
क्या हर विधवा पेंशन लाभार्थी को मिलेगा पिछला पैसा?
इस फैसले में अदालत ने एक ऐसी महिला को बकाया देने का आदेश दिया जिसकी पात्रता पर विवाद नहीं था। अदालत ने यह नहीं कहा कि बिना निर्धारित शर्तें पूरी किए सभी आवेदकों को पिछली अवधि की पेंशन मिल जाएगी। इस मामले की खास बात यह है कि महिला आवेदन के समय पात्र थीं, लेकिन सरकारी प्रक्रिया में देरी के कारण उन्हें समय पर पेंशन नहीं मिली। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर आवेदन की तारीख से बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया।
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