OPS News: 8वें वेतन आयोग के गठन के बीच पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारियों की मांग एक बार फिर सामने आई है। केंद्रीय कर्मचारी एवं अधिकारी परिसंघ (CEOF) झारखंड-बिहार के अध्यक्ष डॉ. सहदेव राम ने पेंशन को कर्मचारियों का सिर्फ सेवा लाभ नहीं, बल्कि कानूनी और संवैधानिक अधिकार बताया है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग उठाई है।
8वें वेतन आयोग से बढ़ी उम्मीदें
डॉ. सहदेव राम ने कहा कि 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग अभी पूरी नहीं हुई है। उनके अनुसार देश में करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगी हैं। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा लाभों की समीक्षा के लिए 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की थी। आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।
पुरानी पेंशन को लेकर क्या कहा गया
डॉ. सहदेव राम के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था वर्ष 1951 से चली आ रही थी। इसमें अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के तौर पर मिलने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 300-ए के तहत संरक्षण प्राप्त अधिकार माना है।
उनके मुताबिक 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना खत्म कर नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई। कर्मचारी संगठन इसका लगातार विरोध करते रहे हैं।
UPS को लेकर भी आपत्ति
डॉ. सहदेव राम ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से केंद्रीय कर्मचारियों के लिए UPS लागू की है, जिसमें सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान है। हालांकि उनके अनुसार देश के अधिकांश कर्मचारी संगठनों ने इसे स्वीकार नहीं किया है और वे अभी भी पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देशभर में कर्मचारी संगठन OPS की बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
दूसरे देशों का उदाहरण दिया
डॉ. सहदेव राम ने दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन की व्यवस्था है। उनके अनुसार वहां पेंशनभोगियों को चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में समय-समय पर पेंशन से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।
पुरानी पेंशन को आर्थिक बोझ बताने पर सवाल
उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को आर्थिक बोझ बताए जाने के तर्क पर भी सवाल उठाया। डॉ. सहदेव राम ने पूर्व सचिव एस.एन. गुलाटी के हवाले से दावा किया कि पुरानी पेंशन का देश की आर्थिक स्थिति पर वैसा प्रभाव नहीं पड़ता, जैसा बताया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। लेकिन 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के मुद्दे पर अभी सकारात्मक चर्चा नहीं हुई है।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें
डॉ. सहदेव राम के अनुसार NCCPA और FCPA जैसे संगठनों ने आंदोलन के अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने संसद में पारित Validation Clause को वापस लेने और 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference (TOR) में बदलाव करने की मांग रखी है।
खबर में बताई गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- पुरानी पेंशन योजना: OPS को फिर से लागू करने की मांग।
- पेंशन का अधिकार: पेंशन को कानूनी और संवैधानिक अधिकार बताया गया।
- Validation Clause: संसद में पारित Validation Clause को वापस लेने की मांग।
- 8वें वेतन आयोग का TOR: Terms of Reference में बदलाव करने की मांग।
- पेंशन संशोधन: 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में भी संशोधन करने की मांग।
- आंदोलन: पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए आंदोलन जारी रखने की बात कही गई।
OPS बहाली की मांग जारी
डॉ. सहदेव राम ने कहा कि कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे। उनके अनुसार कर्मचारियों के पेंशन से जुड़े अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। 8वें वेतन आयोग के बीच OPS और पेंशन संशोधन से जुड़े मुद्दों को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से ये मांगें रखी गई हैं।
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