Family Pension News: परिवार पेंशन से जुड़ा एक मामला साल 2020 से लंबित है। यह मामला दक्षिण पूर्व रेलवे की सेवानिवृत्त कर्मचारी की बेटी मिता बिस्वास का है। मिता विधवा हैं और अपनी मां की मृत्यु के बाद उन्होंने वर्ष 2020 में आश्रित परिवार पेंशन के लिए आवेदन किया था। लेकिन भाई का मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका दावा अब तक लंबित है।
मामले को लेकर भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी से हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, मिता का परिवार पेंशन का दावा लंबे समय से लंबित है और उन्हें अभी तक आवेदन की स्थिति या उसे निपटाने में आ रही समस्या के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
2020 में किया था परिवार पेंशन के लिए आवेदन
मिता के पिता रेलवे कर्मचारी थे और उनकी मृत्यु कई साल पहले हो गई थी। इसके बाद उनकी मां को परिवार पेंशन मिल रही थी। वर्ष 2020 में मां की मृत्यु के बाद मिता ने दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी के कार्यालय में आश्रित परिवार पेंशन के लिए आवेदन किया।
आवेदन के लिए मिता से सभी भाई-बहनों का अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC मांगा गया था। उन्होंने अपने सभी भाई-बहनों से NOC प्राप्त कर लिया, लेकिन एक भाई का NOC नहीं मिल सका। उस भाई और उसकी पत्नी की वर्ष 2020 में कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान मृत्यु हो गई थी।
जब मिता ने अधिकारियों को अपने भाई की मृत्यु के बारे में बताया तो उनसे उसके मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग की गई। लेकिन स्थानीय अधिकारियों से काफी पूछताछ और तलाश के बावजूद मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हो सका। महामारी के दौरान अंतिम संस्कार में भी कोई शामिल नहीं हो पाया था, इसलिए दाह संस्कार का प्रमाण पत्र भी उपलब्ध नहीं था।
मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिलने से अटका दावा
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने पहले ही यह प्रमाणित किया था कि मिता का भाई परिवार पेंशन का वैध दावेदार नहीं था। इसके बावजूद मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण मिता को आश्रित परिवार पेंशन जारी नहीं की गई।
मिता ने कई बार प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी के सामने अपना मामला रखा, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना पेंशन का दावा आगे नहीं बढ़ सका। इस मामले में भारत पेंशनर्स समाज ने भी हस्तक्षेप किया है।
BPS ने अधिकारियों से की जल्द समाधान की मांग
भारत पेंशनर्स समाज ने बताया कि उसने 4 अगस्त 2026 को भी दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी से मिता के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। संगठन ने इस मुद्दे को CPENGRAMS और लंबे समय से लंबित पेंशन शिकायतों के समाधान के लिए सरकार के Special Campaign 3.0 में भी उठाया था।
BPS के अनुसार, पेंशन मंजूर करने वाले अधिकारियों ने न तो मिता या मामले को आगे बढ़ाने वाले संगठन से कोई अतिरिक्त जानकारी मांगी और न ही यह बताया कि उनका दावा अभी किस स्थिति में है। संगठन ने मामले की स्पष्ट समीक्षा कर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
BPS ने रखीं ये सात मांगें
भारत पेंशनर्स समाज ने दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी के सामने मिता के मामले को लेकर सात मांगें रखी हैं। इन मांगों में मामले की वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा से लेकर पात्र पाए जाने पर परिवार पेंशन और बकाया राशि जारी करने की मांग शामिल है।
- मामले की वरिष्ठ स्तर पर व्यक्तिगत समीक्षा की जाए।
- दावे में आ रही कमी या प्रक्रिया संबंधी समस्या की जानकारी दी जाए।
- जहां नियम अनुमति दें, वहां मृत्यु प्रमाण पत्र के स्थान पर उचित वैकल्पिक प्रमाण पर विचार किया जाए।
- उपलब्ध दस्तावेज और लागू परिवार पेंशन नियमों के आधार पर मिता की पात्रता की स्वतंत्र जांच की जाए।
- किसी छूट, स्पष्टीकरण या सक्षम अधिकारी की मंजूरी की जरूरत हो तो उसे आगे बढ़ाया जाए।
- पात्र पाए जाने पर परिवार पेंशन और सभी देय बकाया जल्द मंजूर किए जाएं।
- मामले की स्थिति और आगे की कार्रवाई की जानकारी Action Taken Report के जरिए दी जाए।
BPS ने कहा है कि यदि मिता परिवार पेंशन के लिए पात्र पाई जाती हैं तो उन्हें परिवार पेंशन के साथ सभी देय बकाया भी दिए जाएं। संगठन ने मामले की अंतिम स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी देने की भी मांग की है।
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