Gratuity Rules 2026: ग्रेच्युटी को लेकर 2026 में एक अहम बदलाव सामने आया है। श्रम मंत्रालय ने Labour Codes से जुड़े सवालों के जवाब में ग्रेच्युटी की गणना और वेतन की नई परिभाषा को लेकर स्थिति साफ की है। नई व्यवस्था के तहत ग्रेच्युटी की गणना 21 नवंबर 2025 से लागू प्रावधानों के अनुसार होगी।b इस बदलाव में सबसे ज्यादा ध्यान वेतन में शामिल भत्तों पर है। अगर भत्ते और कुछ तय भुगतान कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाते हैं, तो सीमा से ऊपर की रकम को वेतन में वापस जोड़कर वैधानिक गणना की जाती है।
ग्रेच्युटी की गणना में 50 प्रतिशत नियम क्यों अहम है
नए नियम को आसान भाषा में समझें तो कर्मचारी की पूरी कमाई में Basic Pay, DA और दूसरे भत्तों का हिस्सा देखा जाता है। अगर लागू भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से अधिक हैं, तो अतिरिक्त राशि को वेतन में जोड़ा जाता है। श्रम मंत्रालय ने अपने उदाहरण में ₹76,000 मासिक कुल पारिश्रमिक लिया है। इसमें Basic Pay और DA ₹20,000 तथा भत्ते ₹40,000 हैं। 50 प्रतिशत की सीमा ₹38,000 बनती है। इसलिए ₹2,000 की अतिरिक्त राशि वेतन में जोड़ी जाती है और वैधानिक गणना के लिए वेतन ₹22,000 माना जाता है।
| विवरण | मंत्रालय के उदाहरण में राशि |
|---|---|
| कुल पारिश्रमिक | ₹76,000 |
| Basic Pay + DA | ₹20,000 |
| भत्ते | ₹40,000 |
| 50% सीमा | ₹38,000 |
| सीमा से अधिक राशि | ₹2,000 |
| गणना के लिए संशोधित वेतन | ₹22,000 |
यह सिर्फ श्रम मंत्रालय की ओर से दिया गया उदाहरण है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की ग्रेच्युटी इसी वेतन को आधार मानकर तय होगी।
ग्रेच्युटी के लिए नई तारीख कौन सी है
ग्रेच्युटी की बदली हुई गणना को लेकर श्रम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था 21 नवंबर 2025 से लागू है। यानी इसे पुराने समय से लागू मानकर पीछे की अवधि की गणना नहीं की जाएगी। मंत्रालय के मुताबिक 21 नवंबर 2025 के बाद ग्रेच्युटी से जुड़े मामलों में लागू प्रावधानों के अनुसार गणना की जाएगी। इसलिए 2026 में ग्रेच्युटी का हिसाब देखते समय इस तारीख को ध्यान में रखना जरूरी है।
Fixed Term Employees के लिए क्या बदला
ग्रेच्युटी के नियमों में Fixed Term Employees के लिए भी खास प्रावधान है। श्रम मंत्रालय के मार्च 2026 के FAQ के अनुसार, ऐसे कर्मचारी को अनुबंध शुरू होने की तारीख से एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी के लिए पात्र माना जाएगा। यहां यह भी साफ किया गया है कि Fixed Term Employment का मतलब सीधे नियोक्ता द्वारा नियुक्त कर्मचारी से है। ठेकेदार के जरिए लगाए गए Contract Labour को इस परिभाषा में Fixed Term Employee नहीं माना गया है।
हर कर्मचारी के लिए पांच साल की शर्त एक जैसी नहीं
ग्रेच्युटी को लेकर पांच साल की सेवा वाली बात आम तौर पर सुनने को मिलती है, लेकिन श्रम मंत्रालय के FAQ में कुछ स्थितियों में पांच साल की लगातार सेवा जरूरी नहीं होने की बात स्पष्ट की गई है। मृत्यु, दिव्यांगता और Fixed Term Employment की अवधि खत्म होने जैसे मामलों में अलग प्रावधान लागू होते हैं। Fixed Term Employee के मामले में एक साल की सेवा पूरी होने पर ग्रेच्युटी का प्रावधान बताया गया है।
इसलिए किसी कर्मचारी की पात्रता तय करते समय केवल सेवा के वर्षों को देखना पर्याप्त नहीं है। नौकरी का प्रकार और ग्रेच्युटी का भुगतान किस स्थिति में हो रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है।
ग्रेच्युटी की गणना किस आधार पर होगी
मंत्रालय के FAQ के अनुसार सामान्य स्थिति में ग्रेच्युटी प्रत्येक पूरी सेवा वर्ष या छह महीने से अधिक के अतिरिक्त हिस्से के लिए 15 दिन की मजदूरी के आधार पर तय की जाती है। इसकी गणना आखिरी बार मिली मजदूरी के आधार पर की जाती है। वहीं Fixed Term Employment और मृत्यु से जुड़े मामलों में ग्रेच्युटी pro-rata आधार पर दी जाती है। अलग-अलग रोजगार स्थितियों के लिए नियमों में अलग प्रावधान रखे गए हैं।
2026 में ग्रेच्युटी को लेकर मुख्य बातें
मौजूदा श्रम मंत्रालय की जानकारी से ग्रेच्युटी से जुड़ी स्थिति को इस तरह समझा जा सकता है:
- नई ग्रेच्युटी गणना 21 नवंबर 2025 से लागू है।
- भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से ज्यादा होने पर अतिरिक्त राशि वेतन में जोड़ी जाती है।
- Fixed Term Employee को एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का प्रावधान है।
- कुछ विशेष परिस्थितियों में पांच साल की लगातार सेवा जरूरी नहीं है।
- सामान्य गणना में प्रत्येक पूरी सेवा वर्ष या छह महीने से अधिक के हिस्से के लिए 15 दिन की मजदूरी का आधार लिया जाता है।
कुल मिलाकर Gratuity Rules 2026 में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वेतन की उस गणना से जुड़ा है, जिसमें 50 प्रतिशत की सीमा पार करने वाले भत्तों की अतिरिक्त राशि को वापस वेतन में जोड़ा जाता है। इसके अलावा Fixed Term Employees के लिए एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है।
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