8th Pay Commission Pension: आठवें वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कई उम्मीदें हैं। इसी बीच कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की ओर से One Rank One Pension (OROP) को लेकर एक प्रमुख मांग सामने आई है। मांग है कि OROP का लाभ केंद्रीय सरकार के Level 1 से Level 18 तक के सभी सिविल कर्मचारियों तक भी बढ़ाया जाए। अभी यह व्यवस्था सशस्त्र बलों के कर्मचारियों के अलावा सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को मिलती है।
One Rank One Pension क्या है
One Rank One Pension एक ऐसी पेंशन व्यवस्था है, जिसमें एक ही पद या लेवल पर काम करने वाले और समान अवधि की योग्य सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख अलग होने के बावजूद समान पेंशन देने की व्यवस्था होती है। रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग वेतन आयोगों के तहत सेवानिवृत्त होने के कारण एक ही पद या लेवल के कर्मचारियों की पेंशन अलग हो सकती है। कर्मचारी संगठन इसी अंतर को खत्म करने के लिए OROP की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, C. श्रीकुमार, महासचिव, All India Defence Employees’ Federation (AIDEF) ने कहा कि OROP से अलग-अलग समय पर एक ही पद से सेवानिवृत्त हुए केंद्रीय सिविल कर्मचारियों के बीच पेंशन का अंतर खत्म किया जा सकता है। वहीं All India New Pension Scheme Employees’ Federation के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने कहा कि पुराने पेंशनभोगियों को अलग-अलग वेतन आयोगों के तहत पेंशन संशोधन का लाभ मिलने के बावजूद पेंशन में काफी अंतर है।
अभी किन लोगों को मिलता है OROP का लाभ
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2015 में सशस्त्र बलों के कर्मचारियों के लिए OROP लागू किया था, जिसका वित्तीय लाभ 1 जुलाई 2014 से प्रभावी किया गया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को भी OROP का लाभ मिलता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फिलहाल OROP का दायरा Old Pension Scheme (OPS) के तहत पेंशन पाने वाले पेंशनभोगियों तक सीमित है।
| मुद्दा | रिपोर्ट में दी गई जानकारी |
|---|---|
| OROP का अर्थ | समान पद/लेवल और तुलनीय योग्य सेवा के आधार पर समान पेंशन |
| मौजूदा लाभार्थी | सशस्त्र बलों के कर्मचारी, सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट न्यायाधीश और CAG |
| केंद्रीय सिविल कर्मचारियों की मांग | Level 1 से Level 18 तक OROP लागू करने की मांग |
| मौजूदा सीमा | OPS के तहत पेंशन पाने वाले पेंशनभोगी |
| मांग का मुख्य कारण | अलग-अलग समय पर सेवानिवृत्ति के कारण पेंशन में अंतर |
पुराने वेतन आयोगों में भी पेंशन समानता का मुद्दा
रिपोर्ट में पांचवें और सातवें वेतन आयोग के संदर्भ में भी पेंशन में समानता के मुद्दे का उल्लेख किया गया है। C. श्रीकुमार के अनुसार, 5वें वेतन आयोग ने 1986 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन को 1 जनवरी 1986 की स्थिति के आधार पर वेतन के काल्पनिक निर्धारण के जरिए अपडेट करने की सिफारिश की थी। इसके साथ यह भी कहा गया था कि संशोधित वेतनमान में संबंधित पद के न्यूनतम वेतन की 50 प्रतिशत राशि से कम समेकित पेंशन नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग ने भी पेंशन में समानता के महत्व को माना था। इसमें पुराने और भविष्य के पेंशनभोगियों के बीच अंतर को धीरे-धीरे कम करने के उद्देश्य का उल्लेख किया गया था।
AIDEF ने पेंशन समानता के लिए क्या सुझाव दिया
AIDEF का कहना है कि Notional Fixation के जरिए पुराने पेंशनभोगियों को बाद के वेतन आयोगों के संशोधन के साथ आगे लाने का एक तरीका बनाया जा सकता है। संगठन के अनुसार, इसका आधार कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के समय का पद या लेवल और उस पद के लिए लागू करियर प्रगति होनी चाहिए। इसे केवल सेवानिवृत्ति के समय लागू पुराने वेतनमान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में AIDEF की ओर से सुझाए गए Notional Progression के आधार इस प्रकार बताए गए हैं:
- सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी का पद या लेवल।
- उस पद या लेवल पर लागू संबंधित वेतन।
- सेवा के दौरान मिली वेतनवृद्धियां।
- कर्मचारी को वास्तव में मिली पदोन्नति या करियर प्रगति।
- संबंधित पद या लेवल में बाद में हुआ संशोधन या अपग्रेड, जहां लागू हो।
AIDEF ने यह भी कहा है कि अगर किसी पद को बाद में अपग्रेड किया जाता है, उसका वर्गीकरण बदला जाता है या उसे ऊंचे लेवल पर रखा जाता है, तो उस पद से पहले से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी उस बदलाव के लाभ से पूरी तरह बाहर नहीं किया जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, ऐसा नहीं होने पर पेंशन का अधिकार तय करने में सेवानिवृत्ति की तारीख ही मुख्य आधार बन जाएगी।
पेंशन तय करने का सुझाया गया तरीका
AIDEF ने सुझाव दिया है कि पेंशन सामान्य तौर पर परिणामी Notional Pensionable Pay की 50 प्रतिशत राशि पर तय की जाए। इसके साथ संबंधित पद या लेवल के लिए लागू न्यूनतम पेंशन और अन्य वैधानिक प्रावधानों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।
आठवें वेतन आयोग द्वारा हितधारकों से सुझाव लिए जाने के बीच केंद्रीय सिविल कर्मचारियों के लिए OROP की यह मांग सामने आई है। कर्मचारी संगठनों का मुख्य जोर अलग-अलग समय पर सेवानिवृत्त हुए समान पद या लेवल के कर्मचारियों के बीच पेंशन के अंतर को कम करने की व्यवस्था पर है।
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