EPFO Higher Pension पर कलकत्ता HC का बड़ा फैसला, पेंशनर्स को राहत

Harsh Nigam
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EPFO Higher Pension पर कलकत्ता HC का बड़ा फैसला, पेंशनर्स को राहत

EPFO Higher Pension: अधिक पेंशन को लेकर EPFO सदस्यों के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। अदालत ने EPFO की ओर से अधिक वेतन पर पेंशन की गणना के लिए अपनाई जा रही Pro-Rata Calculation व्यवस्था को खारिज कर दिया है। यह तरीका पेंशन की राशि कम करने से जुड़ा हुआ था।

मामला उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्होंने तय वेतन सीमा से अधिक वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन के लिए योगदान किया था। EPFO की ओर से ऐसे मामलों में सेवा अवधि को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर पेंशन की गणना की जा रही थी। अदालत ने इस तरीके को सही नहीं माना।

क्या है Pro-Rata Calculation का मामला

EPFO की ओर से अपनाई गई व्यवस्था में 1 सितंबर 2014 से पहले और उसके बाद की सेवा को अलग-अलग हिस्सों में देखा जाता था। इसके आधार पर दोनों अवधियों की पेंशन योग्य सैलरी की अलग-अलग गणना की जाती थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तरीके से अधिक वेतन पर पेंशन पाने वाले सदस्यों की पेंशन की राशि कम हो सकती थी। इसी गणना पद्धति को लेकर मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा था।

EPFO ने किस आधार पर गणना की

अधिक वेतन पर पेंशन के मामलों में EPFO ने 14 फरवरी 2024 के एक आंतरिक ई-मेल के जरिए गणना का तरीका बताया था। इसमें 1 सितंबर 2014 से पहले और उसके बाद की सेवा को अलग-अलग करके Pro-Rata आधार पर पेंशन की गणना करने की बात कही गई थी।

बाद में 18 जनवरी 2025 के एक स्पष्टीकरण में भी इसी तरह की व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया। हाईकोर्ट ने इस तरीके को अधिक वेतन वाले मामलों में लागू करने पर सवाल उठाया और संबंधित निर्देशों को रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने EPFO की Pro-Rata पद्धति को अधिक वेतन वाले मामलों में लागू करने को सही नहीं माना। अदालत ने 14 फरवरी 2024 के आंतरिक ई-मेल को रद्द कर दिया। इसके साथ ही 18 जनवरी 2025 के उस स्पष्टीकरण को भी रद्द किया गया, जिसमें अधिक वेतन पर पेंशन की गणना के लिए इसी तरीके को अपनाने की बात थी।

अदालत के फैसले के अनुसार, अधिक वेतन वाले मामलों में पेंशन योग्य वेतन की गणना सेवा अवधि को 1 सितंबर 2014 से पहले और बाद में बांटकर नहीं की जानी चाहिए। पेंशन की गणना के लिए संबंधित योगदान अवधि में सेवा समाप्त होने से पहले के 60 महीनों के औसत मासिक वेतन को आधार माना जाना चाहिए।

फैसले की मुख्य बातें

  • मामला अधिक वेतन पर पेंशन की गणना से जुड़ा है।
  • EPFO की ओर से Pro-Rata Calculation का तरीका अपनाया गया था।
  • इस तरीके में सेवा को 1 सितंबर 2014 से पहले और बाद के हिस्सों में बांटा जाता था।
  • कलकत्ता हाईकोर्ट ने अधिक वेतन वाले मामलों में इस तरीके को सही नहीं माना।
  • 14 फरवरी 2024 का EPFO का आंतरिक ई-मेल रद्द कर दिया गया।
  • 18 जनवरी 2025 का संबंधित स्पष्टीकरण भी रद्द कर दिया गया।
  • पेंशन योग्य वेतन की गणना के लिए सेवा समाप्ति से पहले के 60 महीनों के औसत मासिक वेतन को आधार बनाने की बात कही गई।

अधिक पेंशन पाने वालों के लिए क्या मायने रखता है

यह फैसला उन मामलों से जुड़ा है, जहां कर्मचारियों ने अधिक वेतन के आधार पर पेंशन के लिए योगदान किया था। ऐसे मामलों में EPFO द्वारा अपनाई गई Pro-Rata व्यवस्था के कारण पेंशन की गणना को लेकर विवाद था।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अधिक वेतन वाले मामलों में पेंशन की गणना को लेकर EPFO की यह व्यवस्था लागू नहीं रहेगी। अदालत ने संबंधित निर्देशों को रद्द करते हुए पेंशन योग्य वेतन की गणना सेवा समाप्ति से पहले के 60 महीनों के औसत मासिक वेतन के आधार पर करने की बात कही है।

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मैं हर्ष निगम, वर्तमान में वेतन टुडे में लेखक के साथ-साथ सीनियर एडिटर की जिम्मेदारी संभालता हूँ। मैंने बिहारी लाल स्मारक किसान डिग्री कॉलेज से सोशल साइंस और हिंदी विषय में बी.एससी. की पढ़ाई की है। वर्ष 2020 से कर्मचारी,...

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